Saturday, May 17, 2014

तेरी हुकूमत

तेरी हुकूमत मुझे क़ुबूल है,
पर याद रखना इस हुकूमत का भी इक उसूल है,
मैं जानता हूँ तुझे इक कर्ज़ चुकाना है,
पर याद रखना तुझे इस रिश्ते को भी निभाना है,
मैं डोर थामे रखूँगा अपने छोर की,
तू सिलवटें निकाल देना अपने ओर की,
देखना ये मज़हब की कैंची से न कट जाए,
देखना कहीं ये मांझे के बाजार में न बिक जाए

-- मनु कंचन

Thursday, May 15, 2014

हमने मोहब्बत छोड़ दी

हमने मोहब्बत छोड़ दी,
यूं की अब हमने इबादत छोड़ दी,
जिस छाँव तले हम बैठे थे,
उस छाँव की चाहत छोड़ दी,
जिस हुकुम के हम दीवाने थे,
हमने वो हुकूमत छोड़ दी,
जिस चौखट को हमने किया था सजदा,
हमने वो चौखट छोड़ दी,
जिस हसरत से हम मिले थे रब से,
हमने वो हसरत छोड़ दी,
जिस वफ़ा से हमने निभाये थे रिश्ते,
हमने वो वफ़ा भी छोड़ दी,
बस हमने मोहब्बत छोड़ दी,
यूं की अब हमने इबादत छोड़ दी...

--मनु कंचन